India Russia Relations
India Russia Relations पर यह विस्तृत लेख भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंध, रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वर्तमान चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाओं को सरल हिंदी में समझाता है। UPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण जानकारी।
भाग 1 : भूमिका – भारत और रूस का ऐतिहासिक, सामरिक और भावनात्मक संबंध
भारत और रूस (सोवियत संघ) के संबंध दुनिया के सबसे स्थिर और परस्पर विश्वास पर आधारित संबंधों में से एक माने जाते हैं। भारत की स्वतंत्रता के बाद से ही रूस भारत का विश्वसनीय मित्र रहा है। चाहे 1950–60 के दशक के औद्योगिक विकास हो, 1971 का बांग्लादेश युद्ध, अंतरिक्ष कार्यक्रम, परमाणु ऊर्जा, रक्षा खरीद, या आज का बहुध्रुवीय विश्व — हर चरण में भारत–रूस का तालमेल मजबूत बना रहा है।
पुतिन की बार-बार भारत यात्राएँ दोनों देशों के बीच भरोसे, रणनीति और दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करती हैं। उनकी भारत यात्रा क्षेत्रीय राजनीति, ऊर्जा साझेदारी, रक्षा सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भाग 2 : भारत–रूस संबंध का इतिहास (Historical Evolution)
- स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में संबंध (1947–1960)
- भारत ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद शीत युद्ध में गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई।
- सोवियत संघ ने भारत के औद्योगीकरण में बड़ी मदद की —
- भिलाई स्टील प्लांट
- भारी इंजीनियरिंग उद्योग
- फार्मास्यूटिकल और मशीनरी क्षेत्र
- 1955: नेहरु की USSR यात्रा और 1955: ख्रुश्चेव की भारत यात्रा से संबंध मजबूत हुए।
- 1971: भारत–सोवियत मैत्री संधि (Treaty of Peace, Friendship and Cooperation)
1971 में जब भारत ने बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध में हस्तक्षेप किया,
- USA ने पाकिस्तान का साथ दिया
- चीन भी पाकिस्तान के साथ था
ऐसे माहौल में USSR ने भारत का निर्णायक समर्थन किया।
यह संधि भारत–रूस की “रणनीतिक साझेदारी का प्रारंभिक बिंदु” कही जाती है।
- शीत युद्ध के बाद संबंध (1991–2000)
सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस आर्थिक संकट में था, परंतु भारत से संबंध फिर भी मजबूत रहे।
- 1993: India–Russia Friendship Treaty
- 1996: Military-Technical Cooperation Agreement
- पुतिन युग (2000–2024): रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में भारत–रूस संबंध एक नए स्तर पर पहुँचे।
- 2000: “Strategic Partnership” घोषित
- 2010: “Special and Privileged Strategic Partnership”
- रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार सुधार
भाग 3 : पुतिन की भारत यात्रा – महत्व, उद्देश्य और उपलब्धियाँ
पुतिन क्यों आते हैं भारत? महत्व क्या है?
- द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना
- ऊर्जा— तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा
- रक्षा— S-400, ब्रह्मोस, सुखोई जेट, पनडुब्बी सहयोग
- भू–राजनीति— चीन, अमेरिका, इंडो–पैसिफिक, ब्रिक्स
- आर्थिक— व्यापार, निवेश, नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर, आर्कटिक सहयोग
- ग्लोबल पावर बैलेंस— बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में साझेदारी
भाग 4 : भारत–रूस संबंध के आज के मुख्य स्तंभ
- रक्षा सहयोग (Defence Cooperation) – सबसे मजबूत स्तंभ
प्रमुख बिंदु
- 60–70% भारतीय हथियार रूस/USSR मूल के हैं।
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल — भारत–रूस संयुक्त उत्पादन।
- सुखोई-30 MKI — भारत में रूस के सहयोग से निर्माण।
- T-90 टैंक, Mi-17 हेलिकॉप्टर, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम।
- रूस भारत को हमला करने वाली परमाणु पनडुब्बी (INS Chakra) पट्टे पर देने वाला एकमात्र देश है।
भविष्य की परियोजनाएँ
- ब्रह्मोस-2 (हाइपरसोनिक मिसाइल)
- AK-203 राइफलें — भारत में उत्पादन
- नए लड़ाकू विमान और इंजन सहयोग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीक
- ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation)
रूसी कच्चे तेल की खरीद
- 2022–24 में रूसी कच्चे तेल की भारत को आपूर्ति 100 गुना बढ़ी।
- भारत रूस से दुनिया में सबसे अधिक छूट पर तेल खरीदता है।
- रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।
गैस और LNG सहयोग
- LNG सप्लाई
- आर्कटिक LNG-2 प्रोजेक्ट में भारत की भूमिका
परमाणु ऊर्जा
- कुडनकुलम परमाणु संयंत्र
- 6 रिएक्टरों का निर्माण
- भारत की न्यूक्लियर क्षमता में रूस की केंद्रीय भूमिका
- आर्थिक और व्यापारिक संबंध
व्यापार
- 2023–24: भारत–रूस व्यापार 50+ बिलियन डॉलर पहुँच गया
- 90% व्यापार ऊर्जा क्षेत्र में
निवेश
- रूस भारत के फार्मा, स्टील, और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है।
- भारत रूस के फार ईस्ट (Vladivostok) में निवेश कर रहा है।
भारत–रूस नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC)
- भारत → ईरान → अज़रबैजान → रूस
- यह चीन के BRI का विकल्प माना जाता है।
- अंतरिक्ष और विज्ञान सहयोग
- गगनयान मिशन में रूसी सहायता
- स्पेस सूट, प्रशिक्षण, सुरक्षा मॉड्यूल
- सोयुज तकनीक सहयोग
- ISRO और Roscosmos संयुक्त परियोजनाएँ
- भू–राजनीति और रणनीतिक सहयोग
बहुध्रुवीय विश्व (Multipolarity)
भारत और रूस दोनों अमेरिका–चीन तनाव के बीच एक संतुलित बहुध्रुवीय विश्व की वकालत करते हैं।
BRICS और SCO
- रूस भारत को BRICS मंच पर समर्थन देता है।
- दोनों SCO में आतंकवाद, व्यापार और सुरक्षा पर काम करते हैं।
यूक्रेन युद्ध के बावजूद संबंध स्थिर
- भारत ने रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में कभी वोट नहीं दिया।
- भारत ने “Dialog, Diplomacy, Democracy” का रास्ता अपनाया।
- तेल खरीद जारी रखी।
भाग 5 : पुतिन की हालिया भारत यात्रा – विस्तृत विश्लेषण
मुख्य एजेंडा
- ऊर्जा सुरक्षा
- रक्षा सहयोग का विस्तार
- आर्कटिक में भारत की भागीदारी
- यूक्रेन मुद्दे पर भारत से बातचीत
- BRICS विस्तार
- समुद्री सुरक्षा
- व्यापार संतुलन
- वैश्विक दक्षिण (Global South) में साझेदारी
भाग 6 : दोनों देशों के बीच चुनौतियाँ (Challenges)
- रूस–चीन निकटता
रूस अब चीन का सबसे बड़ा सामरिक भागीदार है।
भारत को चीन से सीमा विवाद है।
इससे भारत–रूस संतुलन प्रभावित हो सकता है।
- रूस–पाकिस्तान संबंधों में सुधार
- गैस पाइपलाइन
- सैन्य अभ्यास
- पाकिस्तान को हेलिकॉप्टर सप्लाई
भारत इसे सावधानी से देखता है।
- भारत–अमेरिका साझेदारी
- QUAD
- Defence Technology Initiative
- Indo-Pacific Strategy
रूस इन क्षेत्रों को संदेह से देखता है।
- यूक्रेन युद्ध
- भारत को तेल से लाभ
- पर वैश्विक दबाव भी
- रूस पर प्रतिबंध बढ़ते जा रहे हैं
भाग 7 : भारत–रूस संबंध का भविष्य (Future Prospects)
- नये रक्षा सहयोग
- हाइपरसोनिक मिसाइलें
- संयुक्त इंजन विकास
- AI आधारित रक्षा तकनीक
- आर्कटिक सहयोग
- नई ऊर्जा परियोजनाएँ
- LNG सप्लाई
- समुद्री नेविगेशन
- अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग का विस्तार
- गगनयान
- मंगल और चंद्र मिशन
- ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम
- व्यापार का विविधीकरण
- फार्मा
- कृषि
- खाद
- हीरे
- IT
- मल्टीपोलर वर्ल्ड में साझेदारी
दोनों देश अमेरिका–चीन वर्चस्व के बीच संतुलित विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।
भाग 8 : UPSC Mains Answer Writing उपयोगी बिंदु
भारत–रूस संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- ऊर्जा सुरक्षा
- रक्षा क्षमता
- भू-राजनीतिक संतुलन
- बहुध्रुवीय विश्व दृष्टिकोण
- अंतरिक्ष व विज्ञान सहयोग
- BRICS, SCO, G20 में तालमेल
- ऐतिहासिक विश्वास
- Indo-Pacific क्षेत्र में स्थिरता
भाग 9 : 30 महत्वपूर्ण तथ्य (Exam-Oriented Bullet Points)
- भारत–रूस संबंध 1950 से मजबूत रूप में विकसित हुए।
- 1971 मैत्री संधि दोनों देशों की साझेदारी का आधार मानी जाती है।
- रूस भारत के रक्षा आयात का 60–70% हिस्सा है।
- ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल है।
- कुडनकुलम भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट है।
- रूस भारत को परमाणु पनडुब्बी पट्टे पर देने वाला एकमात्र देश है।
- 2023–24 में भारत–रूस व्यापार 50 बिलियन डॉलर से अधिक हुआ।
- INSTC चीन के BRI का विकल्प है।
- भारत रूस का सबसे बड़ा तेल ग्राहक बन गया है।
- यूक्रेन युद्ध में भारत ने रूस के खिलाफ वोट नहीं दिया।
- दोनों देशों की साझेदारी “Special & Privileged Strategic Partnership” कहलाती है।
- पुतिन की यात्राएँ संबंधों की निरंतरता दर्शाती हैं।
- आर्कटिक में दोनों देशों का नया सहयोग उभर रहा है।
- भारत–अमेरिका निकटता रूस के लिए चुनौती है।
- रूस–चीन गठजोड़ भारत पर प्रभाव डालता है।
- रूस–पाकिस्तान संबंध भारत के लिए चिंता का विषय हैं।
- भारत रूस के फार ईस्ट क्षेत्र में निवेश कर रहा है।
- रक्षा उत्पादन में Make in India सहयोग बढ़ रहा है।
- भारत का स्टील, फार्मा, और हीरा उद्योग रूस पर निर्भर है।
- आतंकवाद विरोधी सहयोग SCO में दोनों की प्राथमिकता है।
- रूस संयुक्त राष्ट्र सुधार में भारत का समर्थन करता है।
- ब्रिक्स में भारत–रूस तालमेल मजबूत है।
- अंतरिक्ष सहयोग भारत के मानव मिशन के लिए महत्वपूर्ण है।
- रूसी तेल भारत को आर्थिक लाभ देता है।
- भारत संतुलित कूटनीति (Strategic Autonomy) अपनाता है।
- भारत–रूस संबंध किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं हैं।
- भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रक्षा सहयोग बढ़ेगा।
- भारत रूस के लिए एशिया का सबसे बड़ा बाजार है।
- रूस भारत के लिए ऊर्जा का “लाइफलाइन पार्टनर” बन गया है।
- UPSC में यह विषय अत्यधिक संभावित है।
भाग 10 : निष्कर्ष
भारत–रूस संबंध दशकों पुराने विश्वास, रणनीति और परस्पर सम्मान पर आधारित हैं। भले ही आज वैश्विक भू-राजनीति बदल रही हो—
- अमेरिका–भारत साझेदारी बढ़ रही है
- रूस–चीन साझेदारी मजबूत हो रही है
फिर भी भारत और रूस अपने संबंधों को “रुकने” नहीं देते, क्योंकि दोनों की राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा जरूरतें, रक्षा क्षमता, और कूटनीतिक स्वतंत्रता एक-दूसरे से जुड़ी है।
पुतिन की भारत यात्रा इस स्थिर साझेदारी का प्रमाण है और दोनों देशों के बीच नए युग की बहु-आयामी रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत का संकेत देती है।